सोमवार, 14 जनवरी 2013

दामिनी



आज भारत की कैसी अवस्था
यह कैसी सुरक्षा व्यवस्था ?
भारत माता रो पड़ी होंगी
देख अपनी लाडली की अवस्था

एक घर की चिरकली थी जो
सबके दिलो में बसती थी जो
माँ-पिता की आँखों का तारा थी जो
धूमिल हो गई, जाने कहाँ चली गई वो?

माँ के आंसू रुके नहीं होंगे
पिता का दिल भी रोया होगा
देख माँ बाप की अवस्था
रो रही होगी दामिनी

जिस घर की ख़ुशी थी जो
जिनके होठों की मुस्कान थी जो
जिनके दिलों का टुकड़ा थी जो
जिनके लिए आशा की किरण थी जो
धूमिल हो गई, जाने कहाँ चली गई वो?

देश आक्रोश से भरा है
उसके आंसुओं का मोल मांग रहा है
देश की लाडली के लिए न्याय मांग रहा है
देख तस्वीरे उसकी दिल भर्रा रहा है

देश की लाडली की  एक छोटी सी पुकार
हमारे लिए एक संकल्प
उसके आंसुओं का मोल
हमारे लिए एक कर्त्तव्य

देना होगा न्याय
याद रखना होगा उसका बलिदान
दोषियों को होनी चाहिए सजा
जिसे याद रक्खे सारा हिन्दुस्तान

किसी घर की लाडली थी जो
सबके होठों की मुस्कान थी जो
है उसकी पुकार
न्याय दो, न्याय दो, न्याय दो

भारत माता की बिटिया थी जो
धूमिल हो गई, जाने कहाँ चली गई वो?

- पारुल घोटीकर




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