गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

रविवार, 24 फ़रवरी 2013

Seminar Adressed on Positive Thinking


कवच ग्रुप द्वारा सकारात्मक सोच पर आधारित सेमिनार का 
दिनांक २४ फरवरी २० १ ३ को आयोजन किया गया 
कार्यक्रम के अवसर का चित्र 


सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

listen Radio brodcasting at Indre akshwani


आकाशवाणी इंदौर पर दिनांक 31 जनवरी 2013 को रिकॉर्डिंग की गई जिसका प्रसारण साहित्यिकी के अंतर्गत 16 फरवरी को किया गया.
video
इस रचना को सुनाने के लिए यहाँ लिंक दे रहा हु अवश्य सुने http://ekhabartoday.com/districts/r_ghotikar_aakashvani.mp3

रविवार, 17 फ़रवरी 2013

संस्कार का अर्थ


संस्कार का अर्थ जीवन को विशेष ढंग से क्रियापूर्ण बनाकर सुदृढ़ता से पालन करने में है. मनुष्य का जीवन उसके बीज से लगाकर अंत में मरण के बाद तक विधानपूर्वक किए जाने का मत रखकर कुछ उपाय सुझाए गए है. इन्ही उपायों को जीवन के विभिन्न खण्डों में बाँटते हुए सोलह संस्कारों के स्वरूपमे निर्दिष्ट किया गया है. सोलह संस्कारों को भी पूर्वार्ध और उत्तरार्ध में विभक्त किया गया है.
आश्रम व्यवस्था के अंतर्गत मनुष्य जीवन विधि का अनुसरण करता है तो वह सक्षम तथा संवर्धक , पोषक एवं पुष्टिकारक परम्परा का स्थायित्व सुनिश्चित करता है. भारतीय मनीषियों ने पाया कि विशेष प्रकार से आचरण में लाते हुए यदि क्रियाए कि जाती है तो वे पुष्टिकारक बनती है. किस प्रकार के आचरण सक्षम जीवन कि उर्जा हैं? इनको अपनाने से क्या होता है ? जैसे प्रश्नों पर ग्रन्थ निर्मित हुए और आचरणशैली का मार्गदर्शन पर्स्तुत हुआ. ये आचरण ही संस्कारों को ध्वनित किए गए प्रतीत होते है.
आईये इन संस्कारों पर नज़र डालें :
१ गर्भाधान संस्कार
२ पुंसवन संस्कार
३ सीमन्तोन्नयन संस्कार
४ जातकर्म संकार
५ नामकरण संस्कार
६ निष्क्रमण संस्कार
७ अन्नप्राशन संस्कार
८ चूड़ाकर्म संस्कार
९ कर्णविध संस्कार
१० उपनयन संस्कार
११ वेदारम्भ संस्कार
१२ समावर्तन संस्कार
१३ विवाह संस्कार
१४ वानप्रस्थ संस्कार
१५ संन्यास संस्कार
१६ अंत्येष्टि संस्कार

जिस प्रकार कृषक खेत में कर्म करते हुए बीज बोकर निरंतर निगरानी रखते हुए उत्कृष्टतम फसल को प्राप्त  करने के लिए लगा रहता है. बीज को जमींन में रखने के पश्चात, पानी की मात्रा, खाद का पोषण, कीट नियंत्रण एवं विभिन्न औषधियों का दिया जाना एक विशेष प्रक्रिया से किया जाता है उसी तरह परिवार का वर्धन प्राप्त करने कि नियमावली को संसकार के रूप में माना जा सकता है. आधुनिक होते विचारों में पद्धतियों में फेर बदल हुए इसी तरह मनुष्य के पालन में संस्कारों की भूमिका और उसमे परिवर्तन की अवश्यकताओ को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता.
संस्कारों की गर्त में हमें सम्पूर्ण मानसिक नियंत्रण में कार्यों की प्रेरणा दी गई है आश्चर्य नहीं की पशुओं में जिस प्रकार स्वभावगत संस्कार है वे विशेष मौसम की अनुकूलता के साथ अपनी वृद्धि करते दीख पड़ते है, उन्हें मनुष्य के लिए विशेष बातों का ध्यान रखने भक्ष्य तथा अभक्ष्य का सन्देश भी इन संस्कारों के माध्यम से प्रस्तुत करना पड़ा है.
माना कि उपनयन संस्कार से अगली पीढ़ी को संस्कारित कराया जाना एक आवश्यक जीवन कड़ी के रूप में अभिव्यक्त है. तथापि जिन्हें संस्कारों का बोध है वे अपने उत्तरार्ध संस्कारों से निवृत्त बने रहना चाहते है. लोग चाहते है कि उनकी पीढ़ी संस्कारित हो मगर अपनी ओर वे संस्कारों कि मान्यता नकारते दिखते है. समाज में ब्रह्मचर्याश्रम, गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थाश्रम तथा सन्यासाश्रम के भेद में वे उपनयन तथा वेदारम्भ से ब्रह्मचर्याश्रम और समावर्तन व् विवाह संस्कार से गृहस्थाश्रम को पोषण देने तक को अपना क्रम पूर्ण समझते है परन्तु जिन संस्कारों का धारण स्वयं को करना है उनसे विमुख हो जाते है. जब अपसंस्कारित होकर अपमान को महसूस करते है उस वक्त भी मात्र अपने अंतिम यानी अंत्येष्टि का मंत्रपूर्वक होना मन में धरे रहते है.
अब चूँकि बात उपनयन संस्कार कि हो रही है तब विचार उपजना स्वाभाविक ही है कि जीवन के उत्तरार्ध संस्कारों को हमारी पूर्व पीढ़ी ने अंगीकार कहां किया? यदि किया होता तो अनेको संस्कारित वानप्रस्थी और सन्यासी पूर्ण आदर को प्राप्त होते.
आज बुजुर्गो से प्रायः सुनने में आ रहा है कि बेटे ध्यान नहीं दे रहे. खैर !
 उपनयन संस्कार को ठीक प्रकार समझाने कि आवश्यकता है. इस दसवे संस्कार के पूर्व के नौ संस्कार भी जानने कि जरूरत है क्योंकि ये समस्त संस्कार सभी मनुष्यों के लिए है स्त्री पुरुष का भेद भी यहाँ नहीं है.......

शनिवार, 16 फ़रवरी 2013

हल्दीघाटी का युद्ध

समरानल की भीषण लपटें , हल्दीघाटी पर भभक उठी ।
विप्लव की भूखी प्यासी वह, जहरीली नागिन चमक उठी ।1।

तलवारों की आंधी आई , और तीरों का तूफ़ान उठा ।
नर मुण्डों का ढेर लगा , शोणित का पारावार बहा ।2।

मेवाड़ी वीर सपूतों ने , हर हर हर कर जब वार किया ।
लाखों यवनों को समर में , मृत्यु के घाट उतार दिया ।3।

 दंती पर अम्बारी भारी, जिसमें सलीम था झूम रहा ।
मस्ती से पलकें बंद किये, जो फूलों को था चूम रहा ।4।

यवनों को जब बढ़ते देखा, राणा को जोश उमड़ आया ।
जब एड़ लगी, चेतक लपका, सीधा शहजादे पर आया ।5।

राणा का ज़हर ज़हर बूझा भाला, दुर्भाग्य निशाना चुक गया ।
शहजादे को आई मूर्छा , तन का सब रक्त सूख गया ।6।

कट चुकी काट कर लाखों को छोटी सी सैना राणा की ।
वह भी तीरों से घायल था , थी दशा बुरी महाराणा की ।7।

वह समर धरा को छोड़ चला , सैनिक के मूक इशारे से ।
जिसने राणे का वेश किया , उसने कई शीश उतारे थे ।8।

राणा का भाई जो अब तक , वह शक्तिसिंह कहलाता था ।
मेवाड़ी सेना पर जो खड्ग , जहरीले बाण चलाता था ।9।

पर देख दशा भाई की यह, भाई का प्यार उमड़ आया ।
शक्ति की सूखी आँखों में, सावन का मेघ उमड़ आया ।10।

नयनों से फूट फूट झरनें बहते भाई का प्यार लिए ।
बहते वे अविरत जाते थे , महाराणा का अभिसार किए ।11।

रोना छोड़ा, जब ध्यान हुआ, कर्त्तव्य जागा, वह उछल पड़ा ।
राणा की जान बचाने को, शोणित भाई का उमड़ पड़ा ।12।

दृग से अंगारे भभक उठे, भोहों में सुकुड़न दीख पड़ी ।
जो दबी हुई सोई सी थी, ममता भाई की चीख पड़ी ।13।

घोड़े को देकर फिर लगाम , कर्त्तव्य और प्रस्थान किया ।
जो भूल गया था पथ अपना , पथ उसने निज पहिचान लिया ।14।

दोनों के मस्तक काट दिये, पैरों से नेत्र रोंध डाले ।
आगे बढ़ाते ही शक्त गया , फिर कौन रहे बढ़ने वाले ।15।

शक्ति को सन्मुख देख प्रथम राणा का मस्तक चकराया ।
घायल दिल को कुछ धैर्य मिला, था स्रोत रुधिर का बहा नया ।16।

मेरी छाती चीरी जाती , मुगलों की तुच्छ कटारी से ।
क्या ये आँखे कुचली जाती ? सचमुच उस मुग़ल भिखारी से ।17।

"सौभाग्य मेरा जो आये तुम, शक्ति? राणा यूँ बोल उठा ।
ये शब्द सुने जब शक्ति ने , विव्हल दिल उसका डोल उठा ।18।

"जल्दी शक्ति इस ग्रीवा पर , अपनी तलवार चलो तुम ।
भाई का उर प्राणांत अभी, भाई का प्यार जतादो तुम ।19।

.
"सचमुच अपराध हुआ मुझ से, बच्चे सा रुदन किया भारी ।
आँखों से फूट पड़ी बदली, और आर्द्र हुई धवनीसारी ।20।

सचमुच बहि आगे निकली , राणा के दग से धार बही ।
दो भ्राताओं का महा-मिलन , उस सुख का पारावार नहीं ।21।







उक्त पंक्तिया किस कवि की है यह तो नहीं मालुम मगर आहुति नाम की पुस्तिका का पन्ना हमें पान की दूकान से प्राप्त हुआ जिसे मै यहाँ लगा रहा हूँ 

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

प्रणय दिवस


इज़हार करने से डर भी लगता है 
और मिठास का एहसास भी
फिर 
बिखरने का भाव भी आता है 
मिल जाए तो सुख पाने का मन बन आता है 
अब क्या तो करूँ इज़हार 
जो दिख रहा हो करता खबरदार 
पर है तो खुबसूरत 
दिल है के मानता नहीं 


जहां भी हो ...............

सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

Hyna injured in road mishap




इंडियन स्ट्राइप्ड हाईना का सड़क पर दुर्घटना में पैर घायल हो गया
इलाज की सुविधा जुटाने के लिए वन विभाग को महू जाना पडा 
रतलाम से 180 की मी दूर पशु चिकित्सालय में विशेष सुविधाए होने से 
यह वन्य जीव वहां ले जाया गया।  

मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

आकाशवाणी इंदौर MW 648 KHz पर वार्ता का प्रसारण 16 फरवरी 2013 की शाम 6:15 पर

16 फरवरी 2013 
की 
शाम 6:15 पर 
आकाशवाणी इंदौर से MW 648 KHz पर होगा संस्मरणात्मक वार्ता का प्रसारण 

शनिवार, 2 फ़रवरी 2013

16 फरवरी 2013 की शाम 6:15 पर आकाशवाणी इंदौर से होगा वार्ता का प्रसारण

16 फरवरी 2013 
की 
शाम 6:15 पर 
आकाशवाणी इंदौर से होगा वार्ता का प्रसारण