रविवार, 5 जनवरी 2014

सुश्री डॉ. लीला जोशी

सुश्री  डॉ. लीला जोशी
पिता–स्व. श्री जमनादत्त जोशी
माता –स्व. श्रीमती पार्वती जोशी
जन्म स्थान – रतलाम
जमनादतजी के 8 बच्चो में तीसरा स्थान
प्राथमिक शिक्षा - रतलाम के रेल्वे स्कूल से
माध्यमिक एवं हाई स्कूल -  गंगापुर सिटी 1954
ईटर साईंस  - महारानी कॉलेज, जयपुर 1956
मेडिकल शिक्षा - एम.जी.एम. कॉलेज, इन्दौर 1961
22 वर्ष की उम्र में रेल्वें के शासकीय सेवा में सन १९62 में असिस्टेंट सर्जन के रूप में नौकरी प्रारंभ की । पहली  पोस्टिंग कोटा में रही । तत्पश्चात 29 वर्ष कोटा में निरंतर प्रमोशन पाते हुए मेडिकल  सुपरिटेन्डेंट तक का सफर तय किया, फिर  91 में  एग्जीक्यूटिव (हेल्‌थ)डायरेक्टर के रूप में प्रमोशन पाकर रेल मंत्रालय दिल्ली में पदस्थ हुई। वहां से मुम्बई आकर मेडिकल डायरेक्टर का पद संभाला, अन्त में गुवाहाटी आसाम से चीफ मेडिकल  डायरेक्टर के पद से सेवानिवृत हुई। उल्लेखनीय है कि रेलवे में प्रथम महिला चिकित्सक कहलाने का सौभाग्य है जब लेप्रोस्कोपी सर्जन के रूप में आपने काम किया।
नौकरी करते हुए प्रत्येक लेवल पर अवार्ड मिलते रहे,  जिनमें विशिष्ट सेवा पदक जो रेल मंत्रालय द्वारा रेल्वें  सप्ताह में मिला। उन तमाम अवार्डो की संख्‌या लगभग 10 रही। महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी अभिरूची को ये अवार्ड समर्पित रहें।
रेलव के हर लेवल के अकादमीक कार्यों का प्रमोशन करने का नियम रखा। इसके चलते हुए इन्टरनेशन लेवल पर मेक्सिको में आपका शोध पत्र प्रस्तुत किया गया।सिंगापुर और वाशिगटन में रिसर्च पेपर पढ़ने का मौका मिला। उक्त कार्य शासकीय सेवाओं से पृथक कार्य है ।
सत्तर के दशक में फेडरेशन ऑफ़ ऑब्स्ट्रेटिकस एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटी से जुड़ी।अपने सेवा काल के दौरान रतलाम, कोटा और देहरादून में ऑब्स्ट्रेटिकस एंड गायनेकोलॉजिकल सोसायटी का गठन कर रास्ट्रीय सोसायटी के मेन स्ट्रीम से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। फॉग्सी के इस गठन से लोकल लेवल पर कार्यरत स्त्री रोग विशेषज्ञों को राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म मिला।
फिर जन्म स्थान रतलाम की ओर अचानक 1997 में रूख किया और जैन दिवाकर हॉस्पिटल की शुरूआत में शामिल होकर  इसे स्थापित किया। यहाँ शिविरि लगाकर लगातार निःशुल्‌क सेवाओं को गतिमान किया।
गुवाहाटी में पदस्थ रहते मदर टैरेसा से मुलाक़ात होने का विशेष संयोग रहा। मदर टैरेसा गुवाहाटी में एड्‌स रोगियों के लिए विशेष आवासीय व्‌यवस्था के उद्‌घाटन समारोह में आई थी, और उनके मुलाकात के दौरान उन्होंने सुश्री डॉ.लीलाजोशी का हाथ अपने हाथों में लेकर कहा हमें आपके जैसे सेवाभावी चिकित्सकों की  आवश्यकता है। उनके इन शब्‌दों में जैसे जादू भरा था। उनके स्पर्श ने विगत स्मृतियों में आदिवासी महिला की रक्ताल्पता से हुई मृत्यु को स्मरण कराया, और जीवन को नई दिशा सेवा मूल्य को समझने के लिए दी।
रतलाम आकर लगाए जा रहे शिविरों में मूलतः ग्रामीण एवं आदिवासी समुदाय का विशेष ध्यान रखा गया।

फिर २००३ में स्थापना हुई आदि सामाजिक सेवा संस्थान की।  इसमें राजमल जी जैन एवं विमलचंदजी जैन एवं अन्य सदस्यों ने रूचि ली। गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं में रक्ताल्पता  के लक्षण और मातृ मृत्यु को लगातार भुगतना पड़ा, जिससे विचार उपजा कि रक्ताल्पता को किसी प्रकार नियंत्रित किया जाए। इसके लिए  रक्ताल्पता को स्कूल लेवल पर ही चिन्हित किया जाना तय हुआ और श्री सेवा संस्थान के रूप में रक्ताल्पता मिशन की शुरूआत हुई। 2003 में गर्भवति माताओं के लिए खुराक में आयरन की दवा, निःशुल्‌क चेक अप तथा पोष्टिक आहार वितरण  की शुरूआत की गई। यह तमाम व्‌यवस्था समाज के डोनेशनसे चलती आई है, जो निरंतर चल  रही है मगर रक्ताल्पता को इस स्तर के पहले  ही नियंत्रक में लेना आवश्यक जाना। इसके लिए जिला चिकित्सालय में भरती गर्भवत्तियों तक आहार एवं दवा पहुँचाना लगातार जारी है, फिर भी गर्भवती माता  के स्तर के पूर्व ही लड़कियों में रक्ताल्पता पर नियंत्रण होना चाहिए यह विचार रहा। 2007 में स्कूल के लेवल पर आदिवासी छात्रों तक आना जाना और उन्ही के स्थान पर जाकर रक्ताल्पता के कारण जानकर उनका निराकरण करने के लिए शरीर के लोह तत्व को बढ़ाना लक्षित हुआ। शासकीय अस्पतालों से दवाई लाना हर छात्र की डिमांड बन रही थी। इसके लीए उन्हीं के विद्यालय में आयरन की गोलियाँ वितरित होना चाहिए इसके लिए रतलाम ऑब्स्ट्रेटिकस एवं गायनेकोलॉजिकल सोसायटी तथा मुख्य जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से चर्चा करना तय हुआ।बच्चों का रक्त परीक्षण करना एक महत्ती जरूरत होने के बावजूद शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग के स्कूलो में शिविर लगाना समस्या बना रहा। दूरस्थ स्थानों पर जाने आने तथा सेवाओं की उपलब्‌धता की आवश्यकता रही। विभिन्न  सामाजिक संस्थाओं का रूझान इस ओर मोड़ने की आवश्यकता थी, डोनर्स की जरूरत थी। संस्था के सदस्यों ने अपनी सेवाओं के साथ आर्थिक जरूरतों को भी पूरा करने में कसर नही रखी।
श्री सेवा संस्थान के अध्यक्ष के तौर पर सुश्री डॉ. लीला जोशी ने अपने अभियान को लगातार दिशा दी अपने इस अभियान से पोष्टिकआहार के जरिये 30,000 गर्भवती माताएं, आयरन टेबलेट और दवाओं के जरिए स्कूली  छात्र लगभग 2,50,000  तत्पश्चात आई.वी. आयरन सुक्रोज के लिए  केम्प की शुरूआत कराकर प्रतिमाह सरवन में 200 गर्भवती माताओं को लाभ दिलवाया गया। अब तक लगभग 2150 माताएं लाभ ले चुकी है ।
दवाओं केलिए जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग ने अपना सहयोग जारी रखा है, जबकि वाहन व्‌यवस्था स्वयं संस्था को या सामाजिक संस्थाओं के सहयोग मिलता रहा है। पोष्टिक आहार, समाजसेवीजनों से प्राप्त सहयोग पर निर्भर है।
संस्था का ऑडिट प्रति वर्ष किया जाता है और प्रत्येक इवेंट के प्रति जिला  प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास, शिक्षा एवं आदिवासी विकास विभागों को सूचना दी जाती है ।
स्कूलो में शिविर लगाए जाने में विभागों का सहयोग प्रशंसनीय रहा है, उल्लेखनीय है कि पूर्व पुलिस अधीक्षक डॉ. रमनसिंह सिकरवार साहब  ने नगर सुरक्षा समिति के माध्यम से एनीमिया गतिविधि में उपयोगिता दर्ज की ।
शासकीय सहयोग अप्रत्यक्ष मिलता रहा, जबकि आर्थिक गतिविधियां संस्था को स्वयं ही संचालित करना अनिवार्य रही है ।
संस्था के निरंतर गतिमान रहने के साथ अपना अनुसंधान लगातार जारी है। सीमित क्षेत्रों में कार्यरत रहने के साथ संस्था द्वारा सम्पूर्ण जिले में रक्ताल्पता अभियान में गति लाने के प्रयास जारी है । सरवन के अतिरिक्त, बाजना, रावटी, शिवगढ़ डिस्पेंसरिज में प्रतिमाह 4 से 5 कैम्प की जरूरतों का आंकलन किया गया है। इसके लगने से गर्भवती माताओं का स्वास्थ्य सुधार तो होगा ही, साथ ही बच्चों में कुपोषण भी कम होगा ।
वर्तमान में कुपोषित माता  से उत्पन्न नवजात के प्रति भी आई.वी. आयरन सुक्रोज इंजेक्शन की जरूरत महसूस की गई है।
स्वास्थ्य विभाग एवं जिला  प्रशासन से इस बाबत्‌ चर्चा की आवश्यकता महसूस की जा रही है ।
श्री  सेवा संस्था सम्पूर्ण जिले को एनिमिया फ्री करने के प्रति संकल्पबद्ध है । इसमें पोष्टिक आहार,12/12/12  तथा  आई वि आयरन सुक्रोज का अभियान जारी रखे हुए है। मातृ मृत्यु दर, कुपोषण तथा विकलागता के नियंत्रण में इन अभियानों का अपना महत्व  है। संस्था की गतिविधी में शासकीय सहभागिता की जरूरत है  । सम्पूर्ण प्रदेश में इन अभियानों की आवश्यकता को देखते हुए स्वयं सहायता समूहों को इस प्रकार की ट्रेनिंग तथा विशेषज्ञ सुविधाओं के जरिये स्वस्थ भारत का स्वप्न संस्था का उद्धेश्य है ।

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